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संज्ञा और उसके भेद - सामान्य हिन्दी | Sangya Aur Uske Bhed - Samanya Hindi

संज्ञा की परिभाषा : किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, पदार्थ, स्थान, भाव अथवा दशा के नाम को संज्ञा कहते है। अर्थात् संज्ञा किसी नाम को कहते है, किन्तु रंगों के नाम को छोड़कर। 

जैसे - 

👉 राम पटना जा रहा है। 

👉 गाय एक चौपाया जानवर है। 

👉 बुढ़ापा दु:खदायी होता है। 

👉 सभी के साथ प्रेम करो। 

संज्ञा और उसके भेद - सामान्य हिन्दी | Sangya Aur Uske Bhed - Samanya Hindi

Sangya Aur Uske Bhed - Samanya Hindi


इन वाक्यों में 'राम' व्यक्ति का नाम है। 'गाय' पशुओं की एक जाति विशेष का नाम है। 'बुढ़ापा' एक दशा विशेष का नाम है। 'प्रेम' एक भाव विशेष का नाम है। अत: राम, गाय, बुढ़ापा, प्रेम आदि संज्ञा शब्द  है।  

संज्ञा के भेद

संज्ञा के पाँच भेद है - 

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा 
  2. जातिवाचक संज्ञा 
  3. समूह वाचक संज्ञा 
  4. द्रव्यवाचक संज्ञा
  5. भाववाचक संज्ञा
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा : जिस शब्द से किसी खास व्यक्ति, खास वस्तु, खास स्थान या खास भाव का बोध होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे - राम, कुर्सी, पटना आदि। 

2. जातिवाचक संज्ञा : जिस शब्द से किसी जाति के सभी व्यक्तियों, वस्तुओं, स्थानों का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे - गाय, लड़का, लड़की, कुत्ता, पशु, फुल आदि। 

3. समूह वाचक संज्ञा : जिस शब्द से समूह या झुण्ड का बोध होता है, उसे समूह वाचक संज्ञा कहते है। जैसे - सेना, भीड़, वर्ग, सभा, गुच्छा आदि। 

4. द्रव्यवाचक संज्ञा : जिन वस्तुओं को नापा-तौला जा सके, ऐसी वस्तु के नामों को द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। जैसे - पानी, दूध, घी, तेल, सोना, चाँदी, चावल आदि। 

5. भाववाचक संज्ञा : जिस शब्द से किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण, दोष, दशा आदि का पता चलता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते है। जैसे - बुढ़ापा, इमानदारी, चतुराई, प्रेम, मिठास, सुन्दरता आदि । 

Sangya Aur Uske Bhed - Samanya Hindi

भाववाचक संज्ञा बनाना

👉 जातिवाचक संज्ञा से - 
दानव     दानवता
मनुष्य     मनुष्यता
गुरू     गुरूत्व, गुरूता
मित्र     मैत्री
नर     नरता
बच्चा     बचपन
लड़का     लड़कपन 
बूढ़ा     बुढ़ापा
नारी     नारीत्व
भ्राता     भ्रातृत्व
माता     मातृत्व
प्रतिनिधि     प्रतिनिधित्व
राष्ट्र     राष्ट्रीयता
मानव     मानवता
पिता     पितृत्व
साधू     साधुता
दूत     दौत्य
पंडित     पांडित्य

👉 सर्वनाम से -
स्व     स्वत्व
सर्व     सर्वस्व
अपना     अपनत्व, अपनापन
अहं     अहंकार
निज     निजत्व, निजता 
मम (मेरा)     ममता, ममत्व


👉 विशेषण से - 
धीर               धीरता, धैर्य
सम               समता, समानता
मीठा             मिठास
गोरा              गोरापन, गोराई
निर्धन            निर्धनता
असभ्य         असभ्यता
प्रयुक्त प्रयोग
दुष्ट दुष्टता
महान् महानता
संपन्न संपन्नता
शूर शूरता, शौर्य
वीर वीरत्व
नीला नीलापन
लघु लघुत्व, लघुता 
सभ्य सभ्यता
साहित्यिक साहित्य
एक एकता
अंध अंधकार
सुखद सुखदायी
विपन्न विपन्नता


👉 क्रिया से - 
खेलना         खेल
लिखना         लिखावट
बनाना         बनावट
चढ़ना         चढ़ाई
चलना         चलन
लूटना          लूट
उतरना         उतार
पुकारना         पुकार
घबराना         घबराहट
पढ़ना पढ़ाई
बचाना         बचाव
सजाना         सजावट
मिलना         मिलान, मिलावट
बुझना         बुझौवल
बहना बहाव
दौड़ना         दौड़
चीखना         चीख
उड़ना उड़ान


👉 अव्यय से - 
निकट         निकटता
समीप         सामीप्य
धिक् धिक्कार
वाहवाह         वाहवाही
दूर         दूरी
मना मनाही


👉 विविध - 
आरामदायक आराम
संतोषप्रद संतोष
शक्तिमान शक्ति
लाभप्रद लाभ
प्रशंसनीय प्रशंसा
बलशाली बल


👉 व्यक्तिवाचक से - 
रावण         रावणत्व
हिटलर         हिटलरी
भारत         भारतीय
राम         रामत्व


हमेशा याद रखें

  • जब कभी द्रव्यनाम संज्ञा शब्द बहुवचन के रूप में द्रव्य के प्रकारों का बोध करता है, तब वह जातिवाचक संज्ञा बन जाता है। जैसे - यह फर्नीचर कई प्रकार के लकड़ियों से बना है।
  • जब समूहवाचक संज्ञा बहुत सी समूह ईकाइयों को प्रकट करता है, तब बहुवचन में प्रयुक्त होता है। जैसै - दोनों सेनाएँ आपस में जमकर लड़ी। 
  • जब कभी भाववाचक संज्ञा शब्द बहुवचन में प्रयुक्त होते है, तब वे जातिवाचक संज्ञा बन जाते है। जैसे - बुराईयों से बचकर रहो। 
  • कुछ भाववाचक शब्द मूल शब्द है। जैसे - प्रेम, घृणा, क्रोध आदि। आधिकांश भाववाचक शब्द यौगिक होते है - लड़का-लड़कपन, गरीब-गरीबी।  

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